लोकसभा में Waqf सुधार विधेयक पारित
2 अप्रैल 2025 को लोकसभा में waqf (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित कर दिया गया। इस विधेयक में waqf board संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने, गैर-मुस्लिम सदस्यों को वक़्फ़ बोर्ड में शामिल करने और सरकारी निगरानी बढ़ाने के प्रावधान शामिल हैं। विधेयक के पक्ष में 288 और विरोध में 232 वोट पड़े। विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई, इसे समुदाय के अधिकारों में हस्तक्षेप बताया। अब यह विधेयक राज्यसभा में विचाराधीन है।
राज्यसभा में संभावित विवाद और राजनीतिक समीकरण
राज्यसभा में, सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के पास 125 सांसदों का समर्थन है, जो बहुमत के लिए आवश्यक 118 से अधिक है। हालांकि, जनता दल (यूनाइटेड) जैसे सहयोगी दलों ने कुछ प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की है, जिससे संभावित विवाद की संभावना बनी हुई है।
कांग्रेस पार्टी की नेता सोनिया गांधी ने विधेयक को संविधान पर “सीधा हमला” बताया है। इसके अलावा, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे “असंवैधानिक” करार दिया है।
इन विरोधों और सहयोगी दलों की चिंताओं के मद्देनजर, राज्यसभा में इस विधेयक पर विस्तृत बहस और संभावित विवाद की संभावना है।
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— Indiapost News (@IPNews_24) April 3, 2025
Waqf Board क्या है ?
Waqf Board एक कानूनी निकाय है, जो मुस्लिम धर्मार्थ संपत्तियों (वक़्फ़) के प्रबंधन और संरक्षण के लिए कार्य करता है। यह बोर्ड वक़्फ़ अधिनियम, 1995 के तहत गठित किया गया है और इसका संचालन केंद्र और राज्य स्तर पर होता है। इसका उद्देश्य धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक कल्याण के लिए वक़्फ़ संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है।
1. Waqf Board की उत्पत्ति
वक़्फ़ (Waqf) इस्लामिक परंपरा में धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए संपत्ति का स्थायी रूप से दान करने की एक व्यवस्था है। ब्रिटिश शासनकाल में, 1913 में “मुस्लिम वक़्फ़ वैधता अधिनियम” पारित किया गया, जिसने वक़्फ़ की कानूनी मान्यता को सुनिश्चित किया।
स्वतंत्र भारत में वक़्फ़ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए “वक़्फ़ अधिनियम 1954” लागू किया गया, जिसे 1995 में संशोधित कर नया कानून बनाया गया। इसके तहत राज्य और केंद्रीय स्तर पर वक़्फ़ बोर्डों का गठन किया गया।
2. वक़्फ़ बोर्ड की संरचना और कार्यप्रणाली
(क) वक़्फ़ बोर्ड की संरचना:
वक़्फ़ बोर्ड आमतौर पर निम्नलिखित घटकों से मिलकर बना होता है:
1. अध्यक्ष – राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एक प्रतिष्ठित मुस्लिम व्यक्ति।
2. सदस्य – इसमें धार्मिक विद्वान, मुतवल्ली (प्रबंधक), सरकारी अधिकारी, सांसद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होते हैं।
3. मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) – यह प्रशासनिक कार्यों को संभालता है।
(ख) कार्यप्रणाली और कार्य नैतिकता:
1. वक़्फ़ संपत्तियों का संरक्षण और प्रबंधन।
2. शैक्षिक और धार्मिक संस्थानों को वित्तीय सहायता।
3. वक़्फ़ संपत्तियों पर अवैध कब्जों को रोकना।
4. वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखना और भ्रष्टाचार को रोकना।
सरकार द्वारा वक़्फ़ बोर्ड में प्रस्तावित सुधार
1. वक़्फ़ संपत्तियों के सर्वेक्षण और पुनः पंजीकरण
सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि सभी वक़्फ़ संपत्तियों का दोबारा सर्वेक्षण और पंजीकरण किया जाए ताकि उनकी सही स्थिति का पता चल सके।
डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग लागू करने का सुझाव दिया गया है ताकि संपत्तियों पर अवैध कब्जे और हेरफेर को रोका जा सके।
राज्य सरकारों को निर्देश दिया जाएगा कि वे एक निश्चित समयसीमा में सर्वेक्षण पूरा करें और सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करें।
2. वक़्फ़ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति
वर्तमान में वक़्फ़ बोर्ड में केवल मुस्लिम समुदाय के सदस्य होते हैं, लेकिन नए संशोधन में गैर-मुस्लिम विशेषज्ञों और न्यायिक सदस्यों को भी शामिल करने का प्रस्ताव है।
इसका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।
3. वक़्फ़ संपत्तियों की निगरानी और सरकारी नियंत्रण
प्रस्तावित संशोधनों के तहत, सरकार को वक़्फ़ बोर्ड के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करने का अधिकार दिया जाएगा।
यदि कोई संपत्ति गलत तरीके से इस्तेमाल हो रही है या विवादित है, तो राज्य सरकार उसे अपने नियंत्रण में ले सकती है।
4. विवाद समाधान के लिए नई न्यायिक व्यवस्था
वर्तमान में वक़्फ़ से जुड़े विवादों का समाधान वक़्फ़ ट्रिब्यूनल द्वारा किया जाता है, लेकिन नए विधेयक में वक़्फ़ मामलों को सिविल कोर्ट के अधीन करने का सुझाव दिया गया है।
इससे न्यायिक प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और न्यायपालिका की सीधी निगरानी होगी।
5. अवैध कब्जे और संपत्ति की बिक्री पर सख्त नियम
किसी भी वक़्फ़ संपत्ति को बेचना या लीज़ पर देना सरकार की अनुमति के बिना संभव नहीं होगा।
अवैध कब्जों को हटाने के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी।
किसी भी प्रकार की हेराफेरी पाए जाने पर संबंधित मुतवल्ली (प्रबंधक) के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान किया गया है।
आलोचना और विरोध:
1. मुस्लिम संगठनों का विरोध: गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति को धार्मिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
2. राजनीतिक दलों का विरोध: कांग्रेस, AIMIM, समाजवादी पार्टी जैसे दलों ने इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन बताया है।
3. कानूनी चुनौतियाँ: संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत धार्मिक संस्थानों के स्वायत्तता के अधिकारों का हनन बताया जा रहा है।
वक़्फ़ सुधार के वैश्विक उदाहरण
1. तुर्की – वक़्फ़ प्रशासन का आधुनिकीकरण
तुर्की ने 1924 में “डायरेक्टरेट ऑफ फाउंडेशन्स (Vakiflar Genel Müdürlüğü)” की स्थापना की, जो वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन का एक केंद्रीकृत निकाय है। यह संस्था पारदर्शिता, वित्तीय स्थिरता, और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए कार्य करती है।
सफलता:
वक़्फ़ संपत्तियों से होने वाली आय का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग लागू कर संपत्तियों के दुरुपयोग को रोका गया।
2. मलेशिया – इस्लामिक फाइनेंस और वक़्फ़ का एकीकरण
मलेशिया ने वक़्फ़ संपत्तियों को इस्लामिक बैंकिंग प्रणाली के साथ जोड़ा और “मलेशिया वक़्फ़ फाउंडेशन” की स्थापना की।
सफलता:
वक़्फ़ संपत्तियों को इस्लामिक फाइनेंस के जरिए उत्पादक निवेशों में बदला गया।
वक़्फ़ भूमि पर कम लागत वाले आवासीय परियोजनाओं और अस्पतालों का निर्माण किया गया।
3. सऊदी अरब – वक़्फ़ संपत्तियों का कॉर्पोरेटाइजेशन
सऊदी अरब में “जनरल अथॉरिटी फॉर वक़्फ़” बनाई गई, जिसने पारंपरिक वक़्फ़ संपत्तियों को आधुनिक व्यावसायिक ढांचे में बदला।
सफलता:
वक़्फ़ संपत्तियों का उपयोग व्यापारिक और आर्थिक विकास के लिए किया गया।
पर्यटन और हज सेवाओं के लिए वक़्फ़ संपत्तियों को प्रभावी रूप से प्रबंधित किया गया।
4. कुवैत और यूएई – वक़्फ़ के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग
इन देशों में वक़्फ़ संपत्तियों के डिजिटल प्रबंधन के लिए ब्लॉकचेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया।
सफलता:
पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी।
सरकारी हस्तक्षेप कम हुआ और समुदायों की भागीदारी बढ़ी।
सीखने योग्य बातें
वक़्फ़ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन आवश्यक है।
डिजिटल टेक्नोलॉजी और इस्लामिक फाइनेंस के समावेश से वक़्फ़ संपत्तियों का अधिकतम उपयोग संभव है।
सरकारी और समुदाय-आधारित भागीदारी से वक़्फ़ संपत्तियों का सामाजिक कल्याण में उपयोग किया जा सकता है।
भारत भी इन उदाहरणों से सीखकर वक़्फ़ संपत्तियों के प्रभावी प्रबंधन के लिए नीतिगत सुधार कर सकता है।
निष्कर्ष:
सरकार द्वारा प्रस्तावित ये सुधार वक़्फ़ संपत्तियों के पारदर्शी और प्रभावी प्रबंधन के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। लेकिन इन सुधारों को लेकर राजनीतिक और धार्मिक संगठनों में मतभेद बना हुआ है। कुछ लोग इसे सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों में दखल करार दे रहे हैं। अब यह देखना होगा कि राज्यसभा में इस पर क्या निर्णय लिया जाता है।