माँ कालरात्रि का परिचय

माँ कालरात्रि नवदुर्गा का सातवाँ स्वरूप हैं। वे अंधकार और बुराई का नाश करने वाली देवी हैं। उनका रूप भयानक है, लेकिन वे भक्तों के लिए कल्याणकारी हैं।

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स्वरूप एवं प्रतीक

माँ कालरात्रि का रंग काला, बाल बिखरे हुए, और तीन नेत्र हैं। वे गर्दभ (गधे) पर सवार हैं, एक हाथ में तलवार और दूसरे में लौह शस्त्र धारण किए हुए हैं। उनका रूप भय निवारक है।

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पौराणिक कथा

उन्होंने रक्तबीज नामक असुर का वध किया, जिसकी रक्त की हर बूंद से नया असुर जन्म लेता था। माँ कालरात्रि ने उसका रक्त पीकर उसे समाप्त किया।

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कैसे करें पूजा?

स्नान करें और माँ को लाल या नीले वस्त्र अर्पित करें।धूप-दीप जलाएं और गुड़, नारियल, लाल फूल चढ़ाएं।मंत्र जाप करें: "ॐ कालरात्र्यै नमः" (108 बार)। गुड़ या काले चने का प्रसाद।आरती करें और शक्ति, भयमुक्ति की प्रार्थना करें।कन्या पूजन करें – माँ के आशीर्वाद के लिए।

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पूजा से लाभ

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा करने से भय, नकारात्मकता और अज्ञान का नाश होता है। वे भक्तों को साहस और आत्मिक ज्ञान प्रदान करती हैं।

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