मां कात्यायनी की उत्पत्ति

महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर, देवी ने उनकी पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए उन्हें कात्यायनी कहा जाता है।

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मां कात्यायनी का स्वरूप

मां कात्यायनी चार भुजाओं वाली हैं। उनके दाहिने हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं, जबकि बाएं हाथों में तलवार और कमल का फूल है। उनका वाहन सिंह है, जो शक्ति का प्रतीक है।

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मां कात्यायनी की  पूजा विधि

गोधूलि वेला में लाल या पीले वस्त्र पहनकर, मां कात्यायनी की पूजा करें। उन्हें पीले फूल, शहद और हल्दी की तीन गांठ अर्पित करें। सुगंधित पुष्प अर्पण से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं।

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मंत्र और आरती

मंत्र: "कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी। नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।" आरती: "जय जय अंबे जय कात्यायनी, जय जगमाता जग की महारानी।"

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मां कात्यायनी की कृपा

मां कात्यायनी की उपासना से भक्तों को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेषकर, अविवाहित कन्याओं के विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

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