चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में मनाई जाती है, जो माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का पर्व है। यह हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। भक्त उपवास रखते हैं, पूजा करते हैं

पहला दिन - शैलपुत्री पूजा

पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है, जो हिमालय पुत्री और शक्ति का प्रतीक हैं। सफेद वस्त्र धारण कर दूध और सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं। उनकी पूजा से जीवन में स्थिरता और शांति मिलती है

दूसरा दिन - ब्रह्मचारिणी पूजा

दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। वे तपस्या और संयम की देवी हैं। सफेद वस्त्र पहनकर भक्त फल और चीनी अर्पित करते हैं। उनकी पूजा से आत्मबल और धैर्य की प्राप्ति होती है।

तीसरा दिन - चंद्रघंटा पूजा

तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है, जो साहस और शक्ति का प्रतीक हैं। लाल वस्त्र धारण कर दूध और मिष्ठान अर्पित किया जाता है। उनकी कृपा से भय और नकारात्मकता का नाश होता है।

चौथा दिन - कूष्मांडा पूजा

चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है। वे ब्रह्मांड की सृजनकर्ता मानी जाती हैं। भक्त नारंगी वस्त्र पहनकर मालपुए का भोग लगाते हैं। उनकी आराधना से सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है।

पाँचवां दिन - स्कंदमाता पूजा

पाँचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा होती है, जो प्रेम और ममता की देवी हैं। पीले वस्त्र धारण कर भक्त केले का भोग अर्पित करते हैं। उनकी कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

छठा दिन - कात्यायनी पूजा

छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है, जो शक्ति और विजय की देवी हैं। हरे वस्त्र पहनकर शहद का भोग लगाया जाता है। उनकी आराधना से बाधाओं का नाश होता है और इच्छाओं की पूर्ति होती है।

सातवां दिन - कालरात्रि पूजा

सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा होती है। वे राक्षसों का संहार करने वाली देवी हैं। ग्रे वस्त्र पहनकर भक्त गुड़ अर्पित करते हैं। उनकी पूजा से भय और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।

आठवां दिन - महागौरी पूजा

आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा की जाती है, जो शुद्धता और ज्ञान की देवी हैं। गुलाबी वस्त्र धारण कर नारियल का भोग लगाया जाता है। उनकी कृपा से मन की अशुद्धियाँ दूर होती हैं।

नवां दिन - सिद्धिदात्री पूजा

नौवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है, जो सिद्धियों की प्रदाता हैं। बैंगनी वस्त्र पहनकर तिल अर्पित किए जाते हैं। उनकी आराधना से आध्यात्मिक और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।

राम नवमी और समापन

नवमी को राम नवमी का पर्व भी मनाया जाता है, जो भगवान राम के जन्म का उत्सव है। भक्त रामचरितमानस का पाठ करते हैं और मंदिरों में पूजा करते हैं। नवरात्रि का समापन भक्तों को आंतरिक शांति, शक्ति और नई ऊर्जा प्रदान करता है।