बूंद-बूंद के लिए तरस रहे लोग, आज भी लगानी पड़ती है 3km की दौड़

 
Karnataka : पानी की किल्लत आज भी है और कल भी रहेगी बस फर्क सिर्फ इतना है कहीं ज्यादा है कहीं कम। आज हम ऐसी ही जगह की बात कर रहे हैं जहां लोग अब भी 3kms पैदल चलकर अपनी जरुरत का पानी भी मुश्किल से जुटा पाते हैं।
कर्नाटक में कालबुर्गी के कई ग्रामीण इलाकों में लोग पानी के संकट का समाना कर रहे हैं। लोगों को अपनी जरुरत का पानी भी बड़ी मुश्किल से मिल पाता है जिसके लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।

इन ग्रमीण इलाकों में बोरवैल काम नहीं कर रहा जिसकी वजह से लोगों के लिए पानी बड़ी समस्या बन गया है। साल दर साल बढ़ती गर्मी में पानी की किल्लत लोगों पर दोहरी मार की तरह बनती जा रही है। पानी के लिए 3 किलोमीटर जाना और उतना ही फासला तय कर वापस आना जिसमें आधा दिन निकल जाता है जिसकी वजह से बाकी काम करने के लिए समय नहीं मिल पाता।

पानी की समस्या ने भारत के कई राज्यों को अपनी चपेट में ले रखा है। जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है। साल दर साल गर्मी का पारा चढ़ रहा है और देश सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है।
पानी को लेकर एक दुविधा की स्थिति है जो देश के कई हिस्सों में दिखाई पड़ती है। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल कृषि क्षेत्र ने देश में मौजूद पानी की सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है। रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि देश में मौजूद पानी का 80 फीसदी खेती में इस्तेमाल होता है जबकि उद्योग इस पानी का 10 फीसदी से भी कम इस्तेमाल करते हैं।


तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के आस पास बना हुआ है। कई राज्यों में पानी की भारी कमी है। खासतौर से महाराष्ट्र का उत्तरी इलाका जहां बीड, नांदेड, परभणी, जालना, औरंगाबाद, नाशिक और सतारा सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं। दक्षिणी कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में तो पानी के नाम पर दंगों की खबरें आ रही है। भारत के केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक कम बारिश ने देश में भूजल का स्तर काफी घटा दिया है। देश के 55 फीसदी कुंओं में पानी का स्तर घट रहा है। दिल्ली और दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश ने 2007 से 2012 के बीच सबसे ज्यादा कमी दी है।

सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरुरत है, सरकार को ये ध्यान रखना होगा की देश पहले बुनयादी जरुरतें चाहता है।

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